Top 20 Google SEO Ranking Factors 2016 in HIndi
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जैसा कि आप में से कई लोग जानते होंगे कि गूगल वेबसाईटों तथा वेब पृष्ठों के स्थान निर्धारण (SERP) के लिए 200 से ज्यादा कारकों (Factors) का इस्तेमाल कर रहा है। इन कारकों एवं एल्गोरिद्म (Algorithm) को तैयार करने वाले गूगल के कर्मचारियों को छोड़कर कोई और व्यक्ति इन 200 से ज्यादा कारकों के पीछे की बातों को सही-सही नहीं जानता है। हलाँकि, कुछ SEO विशेषज्ञ (Expert) हैं जो इन कारकों के संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हैं और बहुत विस्तृत मामले का अध्ययन भी करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, होने वाली घटना के बारे में अब हमारी कुछ हद तक स्पष्ट जानकारी है। इन 200 से ज्यादा संकेतों में से, मेरे पास शीर्ष 20 कारकों की एक सूची है जिसका इस्तेमाल आप 2016 और उसके बाद गूगल में अपने वेबसाईटों के स्थान निर्धारण के लिए कर सकते हैं।

1) शीर्षक में मुख्य कीवर्ड (Main Keyword in Post Title)

शीर्षक (Title) किसी लेख का मुख्य हिस्सा होता है, और यह SEO के संबंध में भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। सबसे पहली चीज़ जिसका गूगल SERP (सर्च इंजन रिज़ल्ट पेज) के लिए संकेत के रूप में विचार करता है, वह है शीर्षक नाम। आपको अपने मुख्य कीवर्ड का अपने शीर्षक में प्रयोग करना चाहिए ताकि यह सर्च इंजन एवं विशेष रूप से गूगल की नज़रों में परिपूर्ण एवं सही-सही लगे।

2) मेटा टैग महत्वपूर्ण हैं (Meta Tags are Crucial)

गूगल में रैंक लाने के लिए मेटा टैग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ये टैग सर्च इंजन को आपकी वेबसाइट के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है। इसके अलावा, इन टैग का उपयोगकर्ताओं को SERP में उनका सामना किस प्रकार की सामग्री से होगा इसके बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप अपनी साइट पर मेटा टैग इस्तेमाल करते हैं, तो फिर सर्च इंजन उन्हें आपके कीवर्ड के साथ आपकी वेबसाइट के बारे में संक्षेप में पता करने के लिए पढ़ता है।

3) डोमेन नेम में कीवर्ड (Keyword in Domain Name)

यदि आपका प्रमुख कीवर्ड (Keyword) आपके डोमेन (Domain) में हो तो कीवर्ड के लिए सर्च इंजनों (Search Engines) में प्रथम स्थान प्राप्त करने की संभावना बहुत अधिक होती है। यदि डोमेन नेम में कीवर्ड होगा, तो सर्च इंजन के क्रॉलर्स (Crawlers) को संबंधित पृष्ठ आसानी से खोजने में सुविधा होगी।

4) H1 एवं H2 टैग्स में कीवर्ड (Keyword in H1 & H2 Tags)

यदि Content राजा है एवं शीर्षक रानी है तो H1 एवं H2 मंत्रीगण हैं। हाँ, यह सही है कि यदि आप कीवर्ड को हेडिंग एक (H1) या हेडिंग दो (H2) में शामिल करते हैं, तो बेहतर स्थान प्राप्त करने की संभावनाएँ आशा से अधिक होती हैं।

5) डोमेन की आयु (Age of Domain Name)

SEO में, यह एक पुरानी कहावत है कि अधिक पुरानी डोमेन नेम रानियाँ होती हैं। आपके पास जितने पुराने डोमेन नेम हों, उतना ही अधिक अच्छा है। यदि एक डोमेन नेम 5 वर्ष पुराना है तो 1 वर्ष पुराने डोमेन नेम की अपेक्षा बेहतर स्थान प्राप्त करने की बहुत अधिक संभावना होती है।

6) विषयवस्तु की गुणवत्ता (Content is King, Content Quality)

आपकी वेबसाइट का Content रैंकिंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आपको Duplicate Content तैयार करने से 100% बचना चाहिए, यदि आपकी वेबसाइट पर साफ़-सुथरा Content हो एवं प्रत्येक पेज बिना किसी Duplicate Content के बना हो तो यह निश्चित ही गुगल में उच्च रैंक प्राप्त करेगा । सर्च इंजन Duplicate Content का विरोध करता है और उस वेबसाइट को रैंक में नही आने देता है या Penalize कर देता है जो Duplicate Content का प्रयोग करते हैं।

7) कीवर्ड सघनता (Keyword Density)

कीवर्ड Density कीवर्डस (Keywords) की संख्या है जिसका आप संपूर्ण लेख में प्रयोग करते हैं, अधिकतम सीमा 3% है लेकिन यदि आप लेख में कीवर्ड का समझदारी से प्रयोग करते हैं और इसे 1% या 2% तक रखते हैं फिर भी SERP में एक उच्च स्थान प्राप्त करने के अवसर बहुत अधिक होते हैं। विभिन्न ऑनलाइन उपकरणों (Online Tools) का इस्तेमाल कर अपने लेखों में Density की जाँच करना नहीं भूलें।

 8) लेख में चित्र एवं वीडियो (Images & Videos in Article)

कुछ वर्षों पहले, हम गूगल में बहुत आसानी से पाठ्य आधारित विषय-वस्तु को शीर्ष स्थान के निकट रखा करते थे, लेकिन अब यह स्थिति नहीं है, सर्च इंजनों में एक समान स्थान पाने के लिए आपको अपने लेखों/पोस्टों में चित्र एवं वीडियो को जोड़ना पड़ेगा। अपने लेख में बहुत अधिक चित्रों एवं वीडियो का प्रयोग नहीं करें, लेकिन विषय-वस्तु (Content) तथा मीडिया (Image & Video) के बीच एक संतुलित अनुपात होना आवश्यक है।

9) वेबसाइट की गति (Website Loading Speed)

इन दिनो SEO में वेबसाइट की लोङिंग स्पीङ का अच्छा होना बहुत आवश्यक है। यदि आपकी वेबसाइट 2 सेकंडों में नहीं खुलती है तब आप संकट में हैं क्योंकि इससे आपकी वेबसाइट पर आये विजिटर पर इसका गलत प्रभाव पङता है और वो किसी अन्य वेबसाइट पर चले जाते हैं। अपनी वेबसाइट की गति को बढ़ाना सुनिश्चित करें।

10) मोबाइल अनुकूलित (Mobile Optimized)

यदि आपके पास अपनी वेबसाइट का मोबाइल संस्करण (Version) नहीं है तो आप सचमुच में मुसीबत में हैं क्योंकि दुनियॉ में 20 प्रतिशत से ज्यादा लोग इंटरनेट का प्रयोग अपने मोबाइल में करते हैं। इसे मोबाइल सहायक बनाएँ ताकि प्रत्येक उपकरण का उपयोग करने वाले हर व्यक्ति के पास यह सुलभ हो, और वर्तमान समय में सर्च इंजन इस चीज़ को पसंद करता ।

11) डोमेन अथॉरिटी (Domain Authority)

गुगल में रैंक लाने के लिए डोमेन अथॉरिटी (DA) भी एक महत्वपूर्ण कारक है। इससे पहले पेज रैंक था जिसका इस्तेमाल हम रैंकिग में सुधार लाने के लिए करते थे। लेकिन अब पेज रैंक का स्थान DA ने ले लिया है, अब आपको अपनी वेबसाइट के DA को बेहतर बनाना आवश्यक हो गया है। इसके लिए आपको उच्च DA वाली वेबसाइटों के साथ बैक लिंक्स तैयार करना चाहिए। यदि आपकी वेबसाइट की DA रैंक 40 या 50 से अधिक हैं तो यह आपकी वेबसाइट रैंकिग के लिए बहुत फायदेमंद है।

12) इन्टर्नल साइट लिंकिंग (Internal Site Linking)

इन्टर्नल साइट लिंकिंग का अर्थ है एक डोमेन के पैज को उसी डोमेन के अन्य पेज से लिंक करना। इस तकनीक का मुख्य रूप से वेबसाइट देखने वालों को उनके आवश्यक स्थान तक मार्गदर्शन करने के लिए नेवीगेशन को आसान बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इन्टर्नल साइट लिंकिंग को सर्वोत्तम SEO प्रथाओ में से एक माना जाता है जिस के साथ आप सर्च इंजन में अपने ऑनलाइन रेंकिंग को बढ़ा सकते हैं।

13) सर्वर स्थान (Server Location)

सर्वर स्थान भी एक अन्य तकनीक है जिस का रैंकिंग को बढ़ाने के लिए SEO Experts द्वारा उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका लक्ष्य अमेरिकी बाज़ार है, तो फिर आपको यह देखना पड़ेगा कि आपके सर्वर अमेरिका में होस्ट किये जाएं। ऐसा करके, आपको SERP में अपनी रैंकिंग में सकारात्मक परिवर्तन दिखेंगे।

14) SSL सर्टिफिकेट (SSL Certificate)

गूगल ने पहले से ही घोषणा की है कि आपकी वेबसाइट पर एक SSL सर्टिफिकेट जोड़ने से आपको रैंकिंग में एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। SSL सर्टिफिकेट उपयोग करने का मुख्य कारण है इंटरनेट पर भेजी जाने वाली जानकारी को एन्क्रिप्ट करना और उसकी रक्षा करना। एक SSL सर्टिफिकेट को शामिल करने से आपकी वेबसाइट को अत्यधिक भरोसेमंद और संरक्षित बनाने में सहायता मिलती है।

15) W3 प्रमाणीकरण (W3 Validation)

यदि आपकी साइट का HTML/CSS एवं JavaScript W3 कन्सॉर्टियम के अनुसार वैध है तो आपके लिए यह मुख्य लाभ वाली बात है, सुस्त न बनें, समय निकालकर जाँच करें कि आपके साइट कोड वास्तव में प्रमाणीकृत है या नहीं।

16) वेबसाइट के लिए साइटमैप (Sitemap for the Website)

साइटमैप को अभी भी आपकी वेबसाइट के क्रम सूची निर्धारण का एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है, सर्च इंजनों के क्रॉलर्स आपकी साइट के संपूर्ण ढ़ाँचे का निरीक्षण करना पसंद करते हैं और अपने डाटाबेस में सूचीबद्ध करने के लिए अधिक उपयुक्त पेजों की तलाश करते हैं।

17) पेंग्विन सुरक्षित एवं उपयुक्त बैकलिंक्स (Penguin Safe & Relevant Backlinks)

पेन्ग्विन उन एल्गोरिथ्मों में से एक है जिसकी शुरूआत गूगल ने स्पैमयुक्त बैकलिंकों का पता लगाने के लिए की, और अब आपको बैकलिंकों को तैयार करने के समय बहुत सावधान रहना चाहिए, क्योंकि यह आपके प्रतिकूल हो सकता है। इसलिए, हमेशा पेंग्विन सुरक्षित एवं उपयुक्त बैकलिंक्स तैयार करें। अनुपयुक्त बैकलिंकों को प्रतिकूल बैकलिंक भी माना जाता है।

18) सामाजिक मीडिया प्लेटफॉर्म पर पदोन्नति (Promotion on Social Media Platforms)

SEO के दृष्टिकोण से सोशल मीडिया आजकल बहुत शक्तिशाली है, इसका वास्तव में महत्व है। यदि आपके ब्लॉग पोस्ट को अधिक लोग लाइक्स और शेयर करते हैं, और उसके संबंध में अपनी टिप्पणियाँ देते हैं तब यह गूगल को आपकी विषय-वस्तु को बहुत जल्दी शीर्ष स्थान प्रदान करने के लिए एक ज़बर्दस्त संकेत देता है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आप उपयोगी विषय-वस्तु तैयार करें एवं आपको अपने पाठकों से अधिकतम सोशल शेयर हासिल हों।

19) यूज़र इंटरेक्शन और यूज़र एक्सपीरियंस (User Interaction & User Experience)

हाल ही के दिनों मे, यूज़र इंटरेक्शन (UI) और युज़र एक्सपीरियंस (UX) सबसे महत्वपूर्ण कारक में से एक बन गए हैं जिन्हें गूगल के सर्च परिणामों में शीर्ष रैंकिंग प्राप्त करने में महत्वपूर्ण माना जाता है। UI और UX का अर्थ है मोबाइल अनुकूल, उचित टेक्स्ट प्लेसमेंट, इमेज प्लेसमेंट, प्रासंगिक सामग्री, फ़ॉन्ट आकार, नेविगेशन और लिंक। इन दोनों को तकनीकी कारक माना जाता है जिस में वेब डिज़ाइन और डेवलपमेंट की प्रक्रिया शामिल है। डिज़ाइनरों और डेवलपर्स को वेबसाइट की गति और मोबाइल के अनुकूल बनाने जैसे आवश्यक कारकों पर काम करने की ज़रुरत होती है।

20) ऑडियंस से सकारात्मक प्रतिक्रिया (Positive Feedback from Audience)

अगर आप अपने ऑनलाइन विजिटर (Visitor) के लिए सूचनात्मक सामग्री प्रदान करते हैं जो उनके लिए मददगार साबित होती हो, तो सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलना बिल्कुल स्पष्ट है। विजिटर और ग्राहकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने से आपकी साइट की प्रामाणिकता बढ़ती है नतीजतन सर्च इंजन के रिज़ल्ट पेज में आपकी रैंकिंग में वृद्धि होती है। सकारात्मक प्रतिक्रिया सकारात्मक रूप से SEO सक्सेस 2016 को प्रभावित करती है।

अंतिम शब्द

SEO अभी भी जीवित है, और यह पहले से भी अधिक शक्तिशाली है। SEO एक परिवर्तनशील प्रक्रिया है, और उपरोक्त बातें मेरे अनुभवों और केस स्टडीज से ली गई हैं। हो सकता है कि आपको इनमें से केवल कुछ पता हो, या शायद आप उन सभी को जानते हों। इसलिए, मैं हमेशा ही आपको नई चीजें खोजने के लिए सुझाव देता हूँ क्योंकि आपके स्वयं के अनुसंधान से अधिक और कुछ भी प्रभावशाली नहीं है और मुझे आशा है कि उपर लिखी बातें आप के लिए फ़ायदेमंद साबित होंगी। अगर आपका कोई सुझाव या प्रश्न हैं, तो उनका स्वागत है, आप नीचे टिप्पणी कर सकते हैं।

नोट – हम अपने सभी visitors से अनुरोध करते है की अगर आप को ये ब्लॉग हेल्पफुल लगा हो तो अपने सभी मित्रो के साथ सांझा करे और देखते रहे और सीखते रहे धन्यवाद् |

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10 COMMENTS

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